भारत में जमीन की रजिस्ट्री (Land Registry) एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रक्रिया है। इसके जरिए खरीदार को जमीन का असली मालिकाना हक मिलता है और भविष्य में किसी भी तरह के विवाद से बचाव होता है। सरकार ने रजिस्ट्री को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए कुछ नए नियम लागू किए हैं। अब जमीन की रजिस्ट्री कराते समय खरीदार और विक्रेता दोनों को 5 आवश्यक दस्तावेज अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करने होंगे। (Land Registry 2025)
जमीन की रजिस्ट्री के लिए जरूरी 5 दस्तावेज
- आधार कार्ड और पैन कार्ड
पहचान सत्यापन और टैक्स से जुड़ी प्रक्रिया पूरी करने के लिए आधार और पैन कार्ड अनिवार्य कर दिए गए हैं। - भूमि से संबंधित पुराने कागजात (Previous Land Records)
जमीन पर पहले से किसी का मालिकाना हक है या नहीं, यह साबित करने के लिए पुराने कागजात आवश्यक हैं। - खसरा-खतौनी और जमाबंदी प्रतिलिपि
यह दस्तावेज साबित करता है कि जमीन पर कोई बकाया या कानूनी विवाद तो नहीं है। - नॉन-एन्कम्ब्रेंस सर्टिफिकेट (NEC)
यह प्रमाण पत्र बताता है कि जमीन किसी बैंक लोन या गिरवी में नहीं है। - पासपोर्ट साइज फोटो और सिग्नेचर प्रूफ
रजिस्ट्री के समय दोनों पक्षों की फोटो और सिग्नेचर जरूरी होंगे ताकि भविष्य में कोई विवाद न हो।
जमीन की रजिस्ट्री की पूरी प्रक्रिया
- स्टाम्प ड्यूटी का भुगतान – खरीदार को जमीन की कीमत के अनुसार तय स्टाम्प ड्यूटी और पंजीकरण शुल्क देना होगा।
- ऑनलाइन आवेदन – राज्य सरकार की रजिस्ट्री वेबसाइट पर जाकर जमीन से संबंधित विवरण भरना होगा।
- दस्तावेज अपलोड करना – सभी जरूरी दस्तावेज ऑनलाइन या ऑफलाइन सबमिट करने होंगे।
- सब-रजिस्ट्रार कार्यालय जाना – खरीदार और विक्रेता दोनों को सब-रजिस्ट्रार ऑफिस जाकर बायोमेट्रिक और साइन करने होंगे।
- रजिस्ट्री की कॉपी प्राप्त करना – प्रक्रिया पूरी होने के बाद खरीदार को जमीन की रजिस्ट्री की कॉपी मिल जाएगी, जो भविष्य में मालिकाना हक का सबूत होगी।

जमीन की रजिस्ट्री अब और भी आसान और सुरक्षित हो गई है। सरकार ने इसे पारदर्शी बनाने के लिए आधार, पैन और भूमि संबंधी दस्तावेज अनिवार्य कर दिए हैं। अगर आप जमीन खरीदने की योजना बना रहे हैं तो इन 5 दस्तावेजों को पहले से तैयार रखें। इससे आपकी रजिस्ट्री प्रक्रिया बिना किसी परेशानी के पूरी हो जाएगी और भविष्य में कानूनी झंझटों से बचाव होगा।
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